अंबरनाथ नगरपरिषद 1975 से 2020 तक का इतिहास

* अब तक पांच नगरसेवकों की हत्या
* कोरोना के कारण हो चुके हैं नपा चुनाव रद्द
* 19 मई 2020 से तीसरी बार लग रहा प्रशासकीय राज
अंबरनाथ। युसूफ शेख

   अंबरनाथ नगरपरिषद 19 मई 2020 से प्रशासक के तहत चलाया जाएगा। नपा सदस्यों का सन 2015-2020 तक कार्यकाल 17 मई को समाप्त हो रहा है। मंगलवार 19 मई से एसडीओ नगरपरिषद के कारोबार को चलाएंगे। आपको याद होगा कि सन 1978 से 1995 तक नगरपरिषद प्रशासकीय राज्य के अलावा 1983 से कल्याण महापालिका के तहत थी। 14 अप्रैल 1992 को अंबरनाथ नपा की पुर्नरचना हुई थी। सन 1975 में नपा का कार्यकाल शुरु हुआ 1978 में भ्रष्टाचार के आरोप के कारण नपा को बर्खास्त कर दिया गया था। सन 1995 में नपा सदस्यों का आम चुनाव हुआ। 20 वर्षों बाद फिर से लोकप्रतिनिधि की सत्ता की शुरुआत हुई। नपा का पहला नगराध्यक्ष भाजपा के दादासाहेब कांबले बने सेना-भाजपा युति के कारण उपनगराध्यक्ष पद शिवसेना की झोली में गया। 1996 में शिवसेना के पास नगराध्यक्ष पद आया। एक वर्ष के कार्यकाल के लिए नगराध्यक्ष का चुनाव नगरसेवक किया करते थे। 1997 में किर्ती ताई अंदाडे शिवसेना की पहली महिला नगराध्यक्षा बनी, उनके कार्यकाल में पालिका मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर 11 दिनों तक हड़ताल पर गए। 1998 में भाजपा की पूर्णिमा कबरे नगराध्यक्षा बनाई गई। उन्होंने राज्य नगराध्यक्ष संघटना की ओर से अंबरनाथ में एक राज्यव्यापी सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें राज्य के 228 नपा में से 225 नपा नगराध्यक्ष और मुख्याधिकारियों ने भाग लिया। राज्य के मुख्यमंत्री नारायण राणे ने समस्याओं को सुना संबोधित किया। संघटना की मांग पर नगराध्यक्ष के कार्यकाल को एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष कर दिया गया। 1999 में अरविंद वालेकर नगराध्यक्ष बने। 1998 में भाजपा शहराध्यक्ष वसंत पांढरे की हत्या हुई, उस समय के मुख्याधिकारी माधवराव शेजूल पर भ्रष्टाचार विरोधी पथक ने कार्रवाई की। 1999 से आज 2020 तक अंबरनाथ पर शिवसेना की सत्ता है। 1995 में 31 नगरसेवक थे 2000 से 2005 तक 41 नगरसेवकों की नपा बनी। नगराध्यक्ष चुनाव में शिवसेना के अरविंद वालेकर को कांग्रेस के पांच नगरसेवकों ने वोट किया। नगराध्यक्ष वालेकर बने तो कांग्रेस के रामदास पाटील उपनगराध्यक्ष हुए। 
  इसी कार्यकाल में शहर में एक भयानक दुर्घटना घटी। 2002 नवंबर में आरपीआय नगरसेवक व ठाणे जिला आरपीआय अध्यक्ष नरेश गायकवाड़ की चिंचपाड़ा में निर्मम हत्या हुई। कई दिनों तक आंदोलन, बंद, उपोषण के अलावा जबरदस्त जनआक्रोश हुआ। हत्या के आरोप में नगराध्यक्ष के साथ 17 लोगों पर नामजद हुआ। बाद में न्यायालय ने पांच को दोषी ठहराते हुए शेष को बरी कर दिया। 2003 में शिवसेना के अभ्यासू नगरसेवक प्रसन्न कुलकर्णी की शहर पूर्व में हत्या कर दी गई। 2005 के चुनाव में शहर की राजनीति में नया मोड़ आया। गुलाबराव करंजुले पक्ष छोड़कर शिवसेना में शामिल हुए। उस समय नियमों के अनुसार जनता के बीच से नगराध्यक्ष चुनना था। गुलाब करंजुले 2005 में नगराध्यक्षा बने 2005 के पंचवर्षीय चुनाव में 50 नगरसेवक शहर से चुनकर आए लेकिन आपसी कलह को देखते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया। 2010 से 2015 तक भी 50 ही नगरसेवक थे। 2010 चुनाव के बाद राकांपा के सदाशिव पाटील और शिवसेना के सुनील चौधरी के बीच नगराध्यक्ष का मुकाबला हुआ लेकिन राकांपा के ही नगरसेवकों में फूटफाट होने से ये चुनाव सुनील चौधरी जीत गए। उनके कार्यकाल में सीमेंट की सड़कों के निर्माण का कार्यकाल शुरू हुआ था। 2011 में नगरसेवक नितिन वारिंगे की शहर पूर्व में हत्या हुई। 2015 से 2020 के चुनाव में 57 नगरसेवकों की नपा बनी। 2015 दिसंबर में दबंग नगरसेवक रमेश उर्फ पप्पू गुंजाल की शहर पश्चिम मोरीवली गांव के रास्ते पर दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। 2015 में ढाई वर्ष के लिए सेना की प्रज्ञा बनसोडे नगराध्यक्ष हुई उसके बाद से आज मई 2020 तक मनिषाताई वालेकर नगराध्यक्षा है। 17 मई को उनका कार्यकाल समाप्त होगा। कोरोना संकट के कारण 2020-25 के चुनाव अप्रैल में नहीं हो सके इसलिए 19 मई से प्रशासक अंबरनाथ नपा का कार्य चुनाव होने तक संभालेंगे।

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