Articles by "dharm"

Showing posts with label dharm. Show all posts

उल्हासनगर का अन्न दाता 
बना थाहिरिया सिंघ दरबार

  • आपदा के दौरान दरबार हमेशा सबसे अग्रसर
  • कोरोना महामारी के दौरान गरीब, बेघर व दिहाड़ी मजदूरों को पहुंचा रहे हैं रोजाना हजारों खाने के पार्सल 
  • सबसे बड़ी निस्वार्थ सेवा के लिए सामाजिक दूरी का पूरा ख्याल रखा जा रहा है


        उल्हासनगर/हीरो बोधा
        उल्हासनगर के सुप्रसिध्द धनगुरु नानक दरबार डेरा संत बाबा थाहिरिया सिंघ साहब जी शहर में हमेशा से ही हर आपदा के दौरान जनसेवा के लिए तैयार रहता है। जिस तरह बाढ़ के दौरान उल्हासनगर ही नहीं परिसर के शहरों में भी दरबार द्वारा लंगर की सेवा हर प्रभावित कोने में पहुंचाई गई थी ठीक उसी तरह इस कोरोना महामारी में भी बेघर, दिहाड़ी मजदूर व गरीब जनता को खाना पहुंचाने का कार्य दरबार द्वारा निस्वार्थ भाव से किया जा रहा है। लाॅक डाऊन के पहले दिन 4 हजार पार्सल से शुरू हुई सेवा आज तकरीबन 10 हजार से अधिक लोगों तक पहुंच रही है। यह सेवा 24 घंटे निरंतर जारी है। इस दरबार से पुलिस विभाग के साथ साथ मनपा प्रशासन, सरकारी अधिकारी, नेता,नगरसेवक, सामाजिक कार्यकर्ता व एनजीओ भी पार्सल पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। दरबार द्वारा सेवाधिकारियों से सामाजिक दूरी के पालन का उचित रूप से ख्याल भी रखा जा रहा है। साथ ही खाना पार्सल के दौरान भी वितरण की उचित व्यवस्था की गई है। नीचे दिए गए सूची में इसका विवरण किया गया है। जिसमें किस तरह व्यवस्था लंगर की है उसकी जानकारी उपलब्ध है। अगर किसी के यहां सेवा प्राप्त नहीं हो रही है अथवा शुरू करनी है तो नीचे दिए गए मोबाईल नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।


1) इंदिरा नगर, उल्हासनगर-5, दिन में 150 पैकेट्स और रात में 150 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9028965529

2) उल्हासनगर रेलवे स्टेशन सीएचएम कालेज क्षेत्र में दिन में 150 पैकेट्स और रात में 150 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8983027171

3) उल्हासनगर-3 पंजाबी कालोनी क्षेत्र, दिन में 65 पैकेट्स और रात में 65 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8830611826

4) उल्हासनगर-3 फ़ालोवर लेन, मीना कालोनी क्षेत्र, दिन में 100 पैकेट्स और रात में 100 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9156596496.

5) उल्हासनगर-2 आज़ाद नगर क्षेत्र दिन में 250 पैकेट्स और रात में 250 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8080005224

6) उल्हासनगर खेमाणी क्षेत्र, दिन में 75 पैकेट्स और रात में 75 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी 9768881112

7) उल्हासनगर-3 क्षेत्र रोड रास्ते सेवा, दिन में 125 पैकेट्स और रात में 125 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो.8108266208.

8) उल्हासनगर-5, तानाजी नगर क्षेत्र, दिन में 200 पैकेट्स और रात में 200 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 7276467845.

9) उल्हासनगर-3 गँगा जमुना सोसाइटी क्षेत्र, दिन में 75 पैकेट्स और रात में 75 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 7841938757.

10) उल्हासनगर-5, वीर तानाजी नगर क्षेत्र दिन में 50 पैकेट्स  रात में 50 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 7709036909.

11) उल्हासनगर-1 म्हारल गाँव क्षेत्र दिन में 300 पैकेट्स और रात में 300 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9049249236.

12) उल्हासनगर-4 सेक्शन-32, क्षेत्र, दिन में 150 पैकेट्स और रात में 150 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 7972006556.

13) उल्हासनगर शहर के पोलिस स्टेशनों, तहसीलदार ऑफिस, एस. डी. ओ. ऑफिस, उल्हासनगर महानगर पालिका एवंम प्रभाग सरकारी क्षेत्रों में दिन रात मिलाकर तकरीबन 800 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, मो. 8806386000.

14) उल्हासनगर-3, अमन टाकीज़ क्षेत्र व परिसर क्षेत्र दिन में 250 पैकेट्स और रात में 250 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो 7387873561 और 9284078867.

15) कल्याण चिंचपाड़ा, कल्याण ईस्ट क्षेत्र, दिन में 50 पैकेट्स और रात में 50 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9172035917.

16) उल्हासनगर-3, सेक्शन 19, क्षेत्र, दिन में 60 पैकेट्स और रात में 60 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9822246807.

17) उल्हासनगर, चोपड़ा कोर्ट क्षेत्र, दिन में 25 पैकेट्स और रात में 25 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9850777131.

18) उल्हासनगर-4, सेक्शन 39, क्षेत्र, दिन में 150 पैकेट्स और रात में 150 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8329650262.

19) उल्हासनगर-3, सेक्शन 22, क्षेत्र, दिन में 60 पैकेट्स और रात में 60 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8208296785.

20) उल्हासनगर, सेक्शन 36, O.T. क्षेत्र, दिन में 75 पैकेट्स और रात में 75 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8668866402

21) उल्हासनगर, आज़ाद नगर श्रेत्र, दिन में 250 पैकेट्स और रात में 250 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8208072518.

22) उल्हासनगर-3, दशहरा मैदान क्षेत्र, दिन में 75 पैकेट्स और रात में 75 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8689933001 / 75068666024.

23) उल्हासनगर-4, मोर्यानगरी और दुर्गा पाड़ा, श्रेत्र, दिन में 100 पैकेट्स और रात में 100 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8975835980 / 7743928475.

24) उल्हासनगर, शाँती नगर क्षेत्र दिन में 75 पैकेट्स और रात में 75 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9130055000.

25) उल्हासनगर, म्हारल वरप क्षेत्र, दिन रात में 350 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8411877000.

26) उल्हासनगर-5, हिललाईन पुलिस क्षेत्र, दिन रात 75 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8806386000.

27) उल्हासनगर, सेक्शन 20 क्षेत्र, दिन में 20 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 7385568271.

28) उल्हासनगर-1, धोबी घाट क्षेत्र, दिन रात में 100 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, C/o DCP, सेवाधारी मो. 9822741188.

29) उल्हासनगर महारळ गाँव क्षेत्र मार्केश्वर स्कूल क्षेत्र, दिन में 50 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 7719032957.

30) उल्हासनगर, राजीव गाँधी नगर, दुनीचंद कालानी काॅलेज क्षेत्र, दिन में 180 पैकेट्स और रात में 180 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9324124350.

31) धनगुरु नानक दरबार डेरा संत बाबा थाहिरिया सिंघ साहब जी क्षेत्र, दिन में 1000 पैकेट्स और रात में 1000 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, नीचे गार्डन में होती है, मो. 7083191919.

32) उल्हासनगर, MM Group, क्षेत्र' दिन में 40 पैकेट्स और रात में 40 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 8007500578.

33) उल्हासनगर-4, वसीटा कालोनी, पवाई क्षेत्र, दिन में 25 पैकेट्स और रात में 25 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो.7767898715.

34) उल्हासनगर आज़ाद नगर क्षेत्र, दिन में 30 पैकेट्स और रात में 30 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9323656353.

35) उल्हासनगर के विभिन्न क्षेत्रों में Mix 400 पैकेट्स की लंगर साहब सेवा, सेवाधारी मो. 9322626121.

इस सप्ताह है संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत और माघ कृष्ण अष्टमी, पढ़ें 22 जनवरी से 28 जनवरी तक के व्रत और त्योहार
22 जनवरी (मंगलवार) : अवम् (द्वितीया तिथि क्षय)। 
23 जनवरी (बुधवार) : माघ कृष्ण तृतीया रात्रि 11.59 बजे तक उपरांत चतुर्थी।
24 जनवरी (गुरुवार) : संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत। तिलकुटी चतुर्थी। गौरी चतुर्थी।
25 जनवरी (शुक्रवार) : माघ कृष्ण पंचमी सायं 6.18 बजे तक उपरांत षष्ठी।
26 जनवरी (शनिवार) : माघ कृष्ण षष्ठी सायं 4.20 बजे तक पश्चात सप्तमी। भारतीय गणतंत्र दिवस।
27 जनवरी (रविवार) : रवि सप्तमी। जगद्गुरु रामानंद आचार्य जयंती। स्वामी विवेकानंद जयंती (तिथि से)।
28 जनवरी (सोमवार) : माघ कृष्ण अष्टमी मध्याह्न 2.30 बजे तक पश्चात नवमी। 


सकट चौथ 24 जनवरी को है। वक्रतुंडी चतुर्थी, माघी चौथ अथवा तिलकुटा चौथ भी इसी को कहते हैं। सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद उत्तर दिशा की ओर मुंह कर गणेश जी को नदी में 21 बार, तो घर में एक बार जल देना चाहिए। सकट चौथ संतान की लंबी आयु हेतु किया जाता है। चतुर्थी के दिन मूली नहीं खानी चाहिए, धन-हानि की आशंका होती है।
देर शाम चंद्रोदय के समय व्रती को तिल, गुड़ आदि का अर्घ्य चंद्रमा, गणेश जी और चतुर्थी माता को अवश्य देना चाहिए। अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस दिन स्त्रियां निर्जल व्रत करती हैं। सूर्यास्त से पहले गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा-पूजा होती है। इस दिन तिल का प्रसाद खाना चाहिए। दूर्वा, शमी, बेलपत्र और गुड़ में बने तिल के लड्डू चढ़ाने चाहिए। 
इस व्रत की कथा है- सत्ययुग में महाराज हरिश्चंद्र के नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया, पर आवां पका ही नहीं। बार-बार बर्तन कच्चे रह गए। बार-बार नुकसान होते देख उसने एक तांत्रिक से पूछा, तो उसने कहा कि बलि से ही तुम्हारा काम बनेगा। तब उसने तपस्वी ऋषि शर्मा की मृत्यु से बेसहारा हुए उनके पुत्र की सकट चौथ के दिन बलि दे दी।
उस लड़के की माता ने उस दिन गणेश पूजा की थी। बहुत तलाशने पर जब पुत्र नहीं मिला, तो मां ने भगवान गणेश से प्रार्थना की। सवेरे कुम्हार ने देखा कि वृद्धा का पुत्र तो जीवित था। डर कर कुम्हार ने राजा के सामने अपना पाप स्वीकार किया। राजा ने वृद्धा से इस चमत्कार का रहस्य पूछा, तो उसने गणेश पूजा के विषय में बताया। तब राजा ने सकट चौथ की महिमा को मानते हुए पूरे नगर में गणेश पूजा करने का आदेश दिया। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट हारिणी माना *जाता है। 

प्रत्येक चंद्र मास में दो चतुर्थी होती है। पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी संकष्टी एवं अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। इस प्रकार 1 वर्ष में 12 संकष्टी चतुर्थी होती है जिनमें माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी विशेष फलदाई है। पंडित शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष की यह विशेष चतुर्थी 24 जनवरी गुरुवार को है। चंद्र देव का उदय रात्रि 9:10 पर होगा। चंद्रोदय के पश्चात लाल या पीला वस्त्र धारण करके ॐ गं गणपतए नमः मंत्र से सकल विघ्न विनाशक श्री गणेश जी का विधिपूर्वक पूजन करने और कम से कम 11 माला उक्त मंत्र का जप करने से मन वांछित फल की प्राप्ति होती है।
संकट चौथ व्रत का महत्व
सीतापुर रोड स्थित हाथी बाबा मन्दिर के ज्योतिषी आनन्द दुबे ने बताया कि यह व्रत स्त्रियां अपने संतान की दीर्घायु और सफलता के लिए करती है। इस व्रत के प्रभाव से संतान को रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है तथा उनके जीवन में आने वाली सभी विघ्न–बाधायें गणेश जी दूर कर देते हैं। इस दिन स्त्रियां पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है और शाम को गणेश पूजन तथा चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात् ही जल ग्रहण करती है।

भारतीय धर्मग्रंथों में कहा गया है कि जब-जब अत्याचार बढ़े हैं, नैतिक मूल्यों का क्षरण हुआ है तथा आसुरी प्रवृत्तियां हावी हुई हैं, तब-तब किसी न किसी रूप में ईश्वर ने अवतार लेकर धर्मपरायण प्रजा की रक्षा की। संपूर्ण विश्व में मात्र भारत को ही यह सौभाग्य एवं गौरव प्राप्त रहा है कि यहां का समाज साधु-संतों के बताए मार्ग पर चलता आया है।
ऐसी ही एक कथा भगवान झूलेलालजी के अवतरण की है। शताब्दियों पूर्व सिन्धु प्रदेश में मिर्ख शाह नाम का एक राजा राज करता था। राजा बहुत दंभी तथा असहिष्णु प्रकृति का था। सदैव अपनी प्रजा पर अत्याचार करता था।

इस राजा के शासनकाल में सांस्कृतिक और जीवन-मूल्यों का कोई महत्व नहीं था। पूरा सिन्धु प्रदेश राजा के अत्याचारों से त्रस्त था। उन्हें कोई ऐसा मार्ग नहीं मिल रहा था जिससे वे इस क्रूर शासक के अत्याचारों से मुक्ति पा सकें।

लोककथाओं में यह बात लंबे समय से प्रचलित है कि मिर्ख शाह के आतंक ने जब जनता को मानसिक यंत्रणा दी तो जनता ने ईश्वर की शरण ली।

सिन्धु नदी के तट पर ईश्वर का स्मरण किया तथा वरुण देव उदेरोलाल ने जलपति के रूप में मत्स्य पर सवार होकर दर्शन दिए। तभी नामवाणी हुई कि अवतार होगा एवं नसरपुर के ठाकुर भाई रतनराय के घर माता देवकी की कोख से उपजा बालक सभी की मनोकामना पूर्ण करेगा।

समय ने करवट ली और नसरपुर के ठाकुर रतनराय के घर माता देवकी ने चैत्र शुक्ल 2 संवत्‌ 1007 को बालक को जन्म दिया एवं बालक का नाम उदयचंद रखा गया। इस चमत्कारिक बालक के जन्म का हाल जब मिर्ख शाह को पता चला तो उसने अपना अंत मानकर इस बालक को समाप्त करवाने की योजना बनाई।

बादशाह के सेनापति दल-बल के साथ रतनराय के यहां पहुंचे और बालक के अपहरण का प्रयास किया, लेकिन मिर्ख शाह की फौजी ताकत पंगु हो गई। उन्हें उदेरोलाल सिंहासन पर आसीन दिव्य पुरुष दिखाई दिया। सेनापतियों ने बादशाह को सब हकीकत बयान की।

उदेरोलाल ने किशोर अवस्था में ही अपना चमत्कारी पराक्रम दिखाकर जनता को ढांढस बंधाया और यौवन में प्रवेश करते ही जनता से कहा कि बेखौफ अपना काम करें। उदेरोलाल ने बादशाह को संदेश भेजा कि शांति ही परम सत्य है। इसे चुनौती मान बादशाह ने उदेरोलाल पर आक्रमण कर दिया।

बादशाह का दर्प चूर-चूर हुआ और पराजय झेलकर उदेरोलाल के चरणों में स्थान मांगा। उदेरोलाल ने सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया। इसका असर यह हुआ कि मिर्ख शाह उदयचंद का परम शिष्य बनकर उनके विचारों के प्रचार में जुट गया।

उपासक भगवान झूलेलालजी को उदेरोलाल, घोड़ेवारो, जिन्दपीर, लालसांईं, पल्लेवारो, ज्योतिनवारो, अमरलाल आदि नामों से पूजते हैं। सिन्धु घाटी सभ्यता के निवासी चैत्र मास के चन्द्रदर्शन के दिन भगवान झूलेलालजी का उत्सव संपूर्ण विश्व में चेटीचंड के त्योहार के रूप में परंपरागत हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

चूंकि भगवान झूलेलालजी को जल और ज्योति का अवतार माना गया है, इसलिए काष्ठ का एक मंदिर बनाकर उसमें एक लोटी से जल और ज्योति प्रज्वलित की जाती है और इस मंदिर को श्रद्धालु चेटीचंड के दिन अपने सिर पर उठाकर, जिसे बहिराणा साहब भी कहा जाता है, भगवान वरुणदेव का स्तुति गान करते हैं एवं समाज का परंपरागत नृत्य छेज करते हैं।

यह सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है। झूलेलाल उत्सव चेटीचंड, जिसे सिन्धी समाज सिन्धी दिवस के रूप में मनाता चला आ रहा है, पर समाज की विभाजक रेखाएं समाप्त हो जाती हैं।

दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश तीनों का ही संयुक्त रूप हैं। मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। इस दिन दत्तात्रेय जी के बालरूप की पूजा की जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार तीनों देवियों पार्वती, लक्ष्मी तथा सरस्वती को अपने पतिव्रत धर्म पर बहुत घमंड हो गया। नारद जी ने इनका घमंड चूर करने के लिए बारी-बारी से तीनों देवियों के पास जाकर देवी अनुसूया के पतिव्रत धर्म का गुणगान करने लगे।
ईर्ष्या से भरी देवियों ने नारद जी के चले जाने के बाद देवी अनुसूया के पतिव्रत धर्म को भंग करने की जिद ठान ली। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश तीनों को अपनी पत्नियों के सामने हार माननी पड़ी और वे तीनों देवी अनुसूया की कुटिया के सामने एक साथ भिखारी के वेश में जाकर खड़े हो गए।
जब देवी अनुसूया इन्हें भिक्षा देने लगी तब इन्होंने भिक्षा लेने से मना कर दिया और भोजन करने की इच्छा प्रकट की। अतिथि सत्कार को अपना धर्म मानते हुए देवी अनुसूया उनके लिए भोजन की थाली परोस लाई, लेकिन तीनों देवों ने भोजन करने से इन्कार करते हुए कहा कि जब तक आप हमें गोद में बिठाकर भोजन नहीं कराएंगी, हम भोजन नहीं करेगें।
अपने पतिव्रत धर्म के बल पर उन्होंने तीनो की मंशा जान ऋषि अत्रि के चरणों का जल तीनों देवों पर छिड़क दिया, जिससे तीनों बालरूप में आ गए। बालरूप में तीनों को भरपेट भोजन कराने के बाद, देवी अनुसूया उन्हें पालने में लिटाकर अपने प्रेम तथा वात्सल्य से उन्हें पालने लगी। धीरे-धीरे दिन बीतने लगे और काफी दिन बीतने पर भी ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश घर नहीं लौटे तब तीनों देवियों को अपने पतियों की चिंता सताने लगी।

Author Name

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.