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छह दिसंबर, 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने के आपराधिक मामले में 28 साल बाद जज सुरेंद्र कुमार यादव की विशेष अदालत अपना फैसला सुना दिया है। जज ने फैसला पढ़ते हुए कहा है कि यह विध्वंस पूर्व नियोजित नहीं था बल्कि आकस्मिक घटना थी। विशेष अदालत ने  लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व कल्याण सिंह सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया है। 

इस मामले में 49 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। इसमें से 17 की मौत हो चुकी है। सीबीआई व अभियुक्तों के वकीलों ने करीब आठ सौ पन्ने की लिखित बहस दाखिल की है। इससे पहले सीबीआई ने 351 गवाह व करीब 600 से अधिक दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए हैं। 30 सितंबर, 2019 को सुरेंद्र कुमार यादव जिला जज, लखनऊ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें फैसला सुनाने तक सेवा विस्तार दिया था। विशेष जज सुरेंद्र कुमार यादव के कार्यकाल का अंतिम फैसला 30 सितंबर को होगा। सीबीआई के वकील ललित सिंह के मुताबिक कि यह उनके न्यायिक जीवन में किसी मुकदमे का सबसे लंबा विचारण है। वह इस मामले में वर्ष 2015 से सुनवाई कर रहे हैं। 

मुस्लिम पक्ष की तरफ से जफरयाब जीलानी ने कहा कि ये फैसला कानून और हाईकोर्ट दोनों के खिलाफ है। विध्वंस मामले में जो मुस्लिम पक्ष के लोग रहे हैं उनकी तरफ से हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।

अदालत ने सुनाया फैसला

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जो हुआ उस पर सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया। विशेष अदालत ने पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह,  उमा भारती, विनय कटियार समेत कुल 32 आरोपियों को बरी कर दिया है।

 

देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्नातक कोर्सेज की फाइनल ईयर परीक्षाओं को लेकर यूजीसी के दिशा-निर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यूजीसी की अनुमति के बिना राज्य एग्जाम रद्द नहीं कर सकते। फाइनल ईयर की परीक्षाएं आयोजित किए बिना छात्रों को पास नहीं किया जा सकता। राज्यों को 30 सितंबर तक एग्जाम कराने होंगे। न्यायालय ने कहा कि जो राज्य 30 सितम्बर तक अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें यूजीसी को इसकी जानकारी देनी होगी। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में यूजीसी के 6 जुलाई के सर्कुलर को सही ठहराते हुए कहा कि  आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्य महामारी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा स्थगित कर सकते हैं लेकिन उन्हें यूजीसी के साथ सलाह मशविरा करके नई तिथियां तय करनी होंगी।
गौरतलब है कि यूजीसी ने छह जुलाई को देशभर के विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि अगर परीक्षाएं नहीं हुईं तो छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। यूजीसी की इस गाइडलाइंस को देश भर के कई छात्रों और संगठनों ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती थी। याचिकाओं में कहा गया था कि कोविड-19 महामारी के बीच परीक्षाएं करवाना छात्रों की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। यूजीसी को परीक्षाएं रद्द कर छात्रों के पिछले प्रदर्शन और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम घोषित करने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर तक फाइनल ईयर की परीक्षाएं कराने के यूजीसी के निर्देशों को चुनौती देनी वाली याचिकाओं पर 18 अगस्त को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इससे पहले यूजीसी ने शीर्ष अदालत को बताया था कि विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों को कोविड-19 महामारी के बीच फाइनल ईयर की परीक्षाएं 30 सितंबर तक आयोजित कराने के संबंध में छह जुलाई को जारी निर्देश कोई फरमान नहीं है, लेकिन परीक्षाओं को आयोजित किए बिना राज्य डिग्री प्रदान करने का निर्णय नहीं ले सकते। यूजीसी ने न्यायालय को बताया था कि यह निर्देश ''छात्रों के लाभ'' के लिए है क्योंकि विश्वविद्यालयों को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों (पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज) के लिए प्रवेश शुरू करना है और राज्य प्राधिकार यूजीसी के दिशा-निर्देशों को नजरअंदाज नहीं सकते हैं।
यहां पढ़ें फाइनल ईयर परीक्षा पर यूजीसी गाइडलाइंस को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले 
- उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जो राज्य 30 सितम्बर तक अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें यूजीसी को इसकी जानकारी देनी होगी।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्टूडेंट्स को प्रमोट करने के लिए राज्यों को एग्जाम अऩिवार्य रूप से कराने होंगे। कोर्ट ने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्य महामारी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा स्थगित कर सकते हैं और यूजीसी के साथ सलाह मशविरा करके नई तिथियां तय कर सकते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा के खिलाफ याचिका खारिज की। कहा- यूजीसी की गाइडलाइंस के मुताबिक ही एग्जाम होंगे।
- यूजीसी ने छह जुलाई को देशभर के विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि अगर परीक्षाएं नहीं हुईं तो छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। यूजीसी की इस गाइडलाइंस को देश भर के कई छात्रों और संगठनों ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती थी। याचिकाओं में कहा गया था कोविड-19 महामारी के बीच परीक्षाएं करवाना छात्रों की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। यूजीसी को परीक्षाएं रद्द कर छात्रों के पिछले प्रदर्शन और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम घोषित करने चाहिए। शीर्ष न्यायालय में इस विषय को लेकर याचिका दायर करने वालों में युवा सेना भी शामिल है जो शिवसेना की युवा शाखा है। उसने महामारी के दौरान परीक्षाएं कराये जाने के यूजीसी के निर्देश पर सवाल उठाया है। 
- दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने अंतिम वर्ष की परीक्षा सहित विश्वविद्यालय की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। हालांकि यूजीसी इस बात पर कायम है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को आयोजित किए बिना स्नातक करने वाले छात्रों को डिग्री नहीं दी जा सकती।
    
- दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने अंतिम वर्ष की परीक्षा सहित विश्वविद्यालय की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। 

- यूजीसी इस बात पर कायम है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को आयोजित किए बिना स्नातक करने वाले छात्रों को डिग्री नहीं दी जा सकती।
- यूजीसी और केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने आठ अगस्त को बताया कि राज्य सरकारें परीक्षाओं को रद्द नहीं कर सकती है। यह शक्ति यूजीसी के पास है।

नीट और जेईई के परीक्षा को टालने की मांग लगातार हो रही है और छात्रों की इस मांग का विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला है। वहीं अब गैर बीजेपी शासित राज्यों के छह मंत्रियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र को इस साल नीट, जेईई परीक्षाएं कराने की अनुमति देने वाले उसके आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया।
वहीं, दूसरी तरफ राजनीतिक दलों के विरोध के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने जेईई और नीट के आयोजन की तैयारियां तेज कर दी है। बुधवार शाम तक जेईई-नीट के करीब 23 लाख में 14 लाख अभ्यर्थियों ने इसे डाउनलोड भी कर लिया। एनटीए के चैयरमैन विनीत जोशी ने कहा कि यह दर्शाता है कि बच्चे बेसब्री से परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं।

अयोध्या। रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से किए जाने वाले भूमि पूजन की तैयारियों के बीच शनिवार को एसपीजी पहुंच गई। जिला प्रशासन की ओर से एसपीजी अधिकारियों को एक होटल में ठहराया गया है। इस बीच एसपीजी के सुरक्षा अधिकारियों ने प्रधानमंत्री के निर्धारित कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का खाका तैयार कर लिया है। एसपीजी रविवार से सुरक्षा व्यवस्था को अपने हाथ में ले लेगी।
इसके एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी ने प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए शासन की पूरी टीम ही यहां उतार दी। इसी को लेकर मुख्य सचिव राजेन्द्र तिवारी व डीजीपी हितेंद्र अवस्थी यहां आए थे। उधर कोविड-19 के प्रोटोकाल का अनुपालन कराने के लिए अलग-अलग स्तरों पर 50-50 आगंतुकों की सूची तैयार की गयी है। 
मुख्य मंच पर मोदी, भागवत, आनंदीबेन, योगी व नृत्यगोपाल बैठेंगे
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार दो सौ से ढाई सौ लोगों के बैठने को सोशल डिस्टेसिंग के साथ बैठाने के पंडाल का क्षेत्रफल बढ़ा कर दो गुना कर दिया गया है। इसके साथ दो अलग-अलग मंच भी तैयार किया जा रहा है। फिलहाल मुख्य मंच पर पीएम मोदी व संघ प्रमुख मोहन भागवत, प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन व मुख्यमंत्री योगी समेत रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास विराजमान होंगे।
पीएम के आगवानी स्थल से परिसर तक सुगंधित पुष्पों की सजेंगी लरियां
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चॉपर पांच अगस्त को पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे साकेत महाविद्यालय के ग्राउंड पर लैंड करेगा। उनकी अगवानी राज्यपाल व मुख्यमंत्री के अलावा रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी करेंगे। इसके बाद वह हनुमानगढ़ी दर्शन-पूजन कर रामलला के दरबार में पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के प्रथम अयोध्या आगमन पर उनके स्वागत की तैयारियों के लिए ही साकेत महाविद्यालय से लेकर रामजन्मभूमि परिसर तक दोनों पटरियों पर सुगंधित पुष्पों की लरियां लगाई जाएगी। इसी के साथ ही हनुमानगढ़ी व भूमि पूजन स्थल पर फूलों की रंगोलियां भी बनाई जाएंगी।
रामजन्मभूमि परिसर में बनेगा बना कोविड हेल्प डेस्क
रामजन्मभूमि परिसर में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम को देखते हुए कोविड हेल्प डेस्क भी बनाया गया है। इस काउंटर पर स्वास्थ्य कर्मी की ड्यूटी के साथ थर्मल स्कैनर, थर्मामीटर, पल्स-आक्सीमीटर रखवाया गया है। इसके साथ ही एवीमेक्टिन टेबलेट भी रखवाया जा रहा है। बताया गया कि यह टेबलेट एण्टी वायरल है जो कि इंफेक्शन को दूर करने के लिए है। बताया गया कि पांच अगस्त के भूमि पूजन में आने वाले आगंतुकों की थर्मल स्क्रीनिंग के साथ उनके पल्स व आक्सीजन लेविल की भी जांच होगी। इसके अलावा जरुरत के लिहाज से एण्टी वायरल टेबलेट भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पहले अलग-अलग टीम पूरे राम जन्मभूमि परिसर को सैनिटाइज भी कर रही है। 

पबजी भी रडार पर
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 47 और चीनी ऐप को प्रतिबंधित कर दिया है। पिछले महीने 59 चाइनीज को भारत में बैन कर दिया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जल्द ही इसकी सूचि जारी की जाएगी। इसके अलावा करीब 250 चीनी ऐप्स की एक सूचि बनाई जा रही है, जिनकी जांच की जानी है। इनपर यूजर की गोपनीयता को भंग करने का आरोप है। पबजी पर बैन के रडार पर बताई गई है।
आपको बता दें कि इससे पहले भारत सरकार ने चीन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 59 चाइनीज चीनी मोबाइल ऐप्स को बैन कर दिया गया था। इसमें टिकटॉक, शेयर इट, यूसी ब्राउजर, हेलो, विगो, जैसे ऐप शामिल हैं। आईटी मंत्रालय ने कहा था कि उसे विभिन्न स्रोतों से कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ मोबाइल ऐप के दुरुपयोग के बारे में कई रिपोर्ट शामिल हैं। इन रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ऐप ''उपयोगकर्ताओं के डेटा को चुराकर, उन्हें भारत के बाहर स्थित सर्वर को अनधिकृत तरीके से भेजते हैं।
केंद्र सरकार ने चीन पर एक और डिजिटल स्ट्राइक की है। भारत की संप्रुभता और अखंडता विरोधी गतिविधियों के आरोप में सरकार ने चीन के 47 और ऐप्स पर बैन लगा दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह सभी पहले बैन किए गए ऐप के क्लोन के तौर पर काम कर रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संबंध में जल्द ही नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।
पबजी समेत 275 ऐप्स भी निशाने पर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और यूजर प्राइवेसी को लेकर 275 ऐप भी सरकार के निशाने पर आ गए हैं। इसमें पबजी और अली एक्सप्रेस जैसे ऐप भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने इन 275 ऐप्स की पहचान जांच के लिए की है। यदि इन ऐप्स में राष्ट्रीय सुरक्षा या अन्य कोई उल्लंघन पाया जाता है तो इन पर बैन लगाया जा सकता है। सरकार चीनी ऐप्स के अलावा ऐसे ऐप पर भी नजर रख रही है जिनका चीन में भी निवेश है।
सरकार ने निशाने पर हैं ये ऐप
ऐपकंपनी
पबजीटेसेंट
जिलीशाओमी
अली एक्सप्रेसअलीबाबा ग्रुप
रेसोबाइट डांस
यूलाइकबाइट डांस
पिछले महीने टिकटॉक समेत 59 चीनी ऐप पर बैन लगाया था
गलवान घाटी में सीमा विवाद के बाद केंद्र सरकार ने चीन के 59 ऐप्स पर बैन लगाया था। जिन ऐप्स पर यह बैन लगाया गया था, उनमें शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉक, वी-चैट, यूसी ब्राउजर, यूसी न्यूज जैसे ऐप भी शामिल थे। इन सभी ऐप्स पर राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों के आरोप में बैन किया गया था।
ऐप्स के लिए नए कानून बना रही है सरकार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र की मोदी सरकार ऐप्स के लिए नए कानून बना रही है। नए कानूनों का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कई सरकारी एजेंसी काम कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि कोई ऐप इन कानूनों का उल्लंघन करेगा तो उसे बैन किया जा सकता है। साइबर सुरक्षा बढ़ाने और भारतीयों का डाटा सुरक्षित रखने के मकसद से यह उपाय किए जा रहे हैं।
चीन-ऑस्ट्रेलिया ने भी दिए बैन के संकेत
भारत की ओर से 59 चीनी ऐप्स पर बैन लगाए जाने के बाद पूरी दुनिया में चीनी ऐप्स पर बैन लगाने की मांग उठने लगी है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया टिकटॉक समेत कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने का संकेत दे चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टिकटॉक के बहाने चीन पर कई बार टिप्पणी कर चुके हैं।

कानपुर। आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारा विकास दुबे शुक्रवार सुबह पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर ला रही यूपी STF की काफिले की गाड़ी आज सुबह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा कानपुर टोल प्लाजा से 25 किलोमीटर दूर हुआ। यूपी एसटीएफ की टीम विकास दुबे को लेकर जैसे ही कानपुर पहुंची, वह गाड़ी में सुरक्षाकर्मियों की पिस्टल छीनने लगा। इसी बीच संतुलन बिगड़ने के बाद गाड़ी पलट गई। गाड़ी पलटते ही विकास पुलिस पर फायरिंगकर भागने लगा।
सुरक्षाकर्मियों ने भी अपने बचाव में गोलियां चलाईं। मुठभेड़ में विकास गंभीर रूप से घायल हो गया। सुरक्षाकर्मी उसे लेकर हैलट अस्पताल पहुंचे जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस कार हादसे में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
विकास दुबे की एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं। सबसे पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस पर तंज कसा है। उनका कहना है कि दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज खुलने से सरकार पलटने से बचाई गई है।
आपको बता दें कि विकास दुबे को गुरुवार सुबह उज्जैन (मध्य प्रदेश) में पुलिस ने गिरफ्तार किया। सात दिन की तलाश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इसके बाद एमपी की पुलिस ने विकास दुबे को उज्जैन कोर्ट में पेश कर देर शाम यूपी एसटीएफ की टीम को सौंप दिया था।
कोरोना टेस्ट के बाद होगा विकास दुबे के शव का पोस्टमार्टम
सीने और कमर में लगीं गोलियां : विकास पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बुरी तरह जख्मी हो गया था। उसके सीने और कमर में दो गोली लगीं। 
- कानपुर हैलट अस्पताल में विकास की बॉडी सील। कोरोना टेस्ट कर बाद  पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा शव।
कानपुर के एसपी वेस्ट डा. अनिल कुमार ने बताया : 
पुलिस वाहन पलटने के बाद पुलिस की पिस्टल छीन कर विकास दुबे भागने लगा। एसकार्ट में पीछे लगी गाडिय़ों में तैनात कानपुर एसटीएफ और पुलिस के जवानों ने घेराबंदी की और विकास को सरेंडर करने को कहा, लेकिन वह नहीं माना और पुलिस पर फायरिंग करने लगा। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से घायल विकास की हैलट अस्पताल में मौत हो गई।
मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी घायल, उर्सला अस्पताल रेफर
विकास दुबे के साथ हुई मुठभेड़ में नवाबगंज एसओ रमाकांत पचौरी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। जहां दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायल पुलिसकर्मियों को कल्याणपुर सीएससी से उर्सला अस्पलात भेज दिया गया है।
- कानपुर शहर से 17 किमी पहले  विकास दुबे को ला रहा पुलिस वाहन हल्की बारिश के बीच भौंती हाईवे के पास अनियंत्रित होकर पलट गया।
- यूपी के पूर्व सीएम और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि कार नही पलटी सरकार पलटने से बचाई गई। 
विकास के 5 अन्य करीबी भी पुलिस एनकाउंटर में हुए ढेर
अबतक विकास दुबे के पांच करीबी साथी पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं जबकि दो अन्य साथी दयाशंकर कल्लू और श्यामू वाजपेयी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए साथियों के नाम हैं- प्रेम प्रकाश (विकास दुबे का मामा), अतुल दुबे (विकास दुबे का भतीजा), अमर दुबे (विकास दुबे का राइड हैंड), प्रभात और प्रवीण उर्फ बउवा। इसके साथ ही वारदात में शामिल 14 आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ पुलिस ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। सीओ, एसओ समेत आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के मामले में विकास समेत 18 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की थी। जांच के बाद 15 लोगों के और नाम सामने आए हैं। इन सभी के नाम भी एफआईआर में बढ़ाए जाएंगे। विकास पर पांच लाख और इन सभी पर फरार अपराधियों पर 50-50 हजार का इनाम घोषित किया गया था।

नई दिल्ली।पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारतीय सेनाओं के साथ हिंसक झड़प के बाद चीन को सैन्य मोर्चे पर करारा जवाब दिया गया। वहीं आर्थिक और अन्य मोर्चे पर भी उसके खिलाफ मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने 59 चाइनीज मोबाइल एप को प्रतिबंधित कर दिया है। इसमें टिकटॉक, यूसी ब्राउसर, शेयर इट और अन्य चाइनीज एप शामिल हैं।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार से कहा था कि या तो चीन से जुड़े 52 मोबाइल एप्लिकेशन को ब्लॉक कर दिया जाए या लोगों को इनका इस्तेमाल ना करने की सलाह दी जाए, क्योंकि इनका इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं है।
ये ऐप बड़े पैमाने पर डेटा को भारत से बाहर भेज रहे हैं। इस मामले से जुड़े लोगों ने पहले ही जानकारी दी थी। सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को जो लिस्ट भेजी थी उसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप जूम, टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, एक्सएंडर, शेयर इट और क्लीन मास्टर जैसे एप शामिल थीं। 
इस साल अप्रैल महीने में गृह मंत्रालय ने जूम के इस्तेमाल को लेकर एक अडवाइजरी जारी की थी। मंत्रालय ने यह अडवाइजरी नेशनल साइबर सिक्यॉरिटी एजेंसी कंप्यूटर इमर्जेंसी रेस्पॉन्स टीम इंडिया (CERT-in) के प्रस्ताव पर जारी की थी। भारत पहला देश नहीं है जिसने सरकार में जूम एप के इस्तेमाल पर रोक लगाई।
इससे पहले ताइवान ने भी सरकारी एजेंसियों को जूम एप के इस्तेमाल से रोक दिया। जर्मनी और अमेरिका भी ऐसा ही कर चुके हैं। कंपनी ने गृह मंत्रालय की एडवाइजरी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वह यूजर्स की सिक्यॉरिटी को लेकर गंभीर है।
सिक्यॉरिटी से समझौता करने वाले मोबाइल एप्स पर कार्रवाई की मांग उठती रही है। वीडियो शेयरिंग एप के स्वामित्व वाली चाइनीज इंटरनेट कंपनी बाइट डांस जैसी कंपनियां इससे इनकार करती रही थी। लेकिन अधिकारियों का कहना था कि चाइनीज डिवेलपर्स की ओर से तैयार या चाइनीज लिंक्स वाले एप भले ही वह एंड्रॉयड के लिए हों या आईओस के लिए, इनका इस्तेमाल स्पाइवेयर या अन्य नुकसान पहुंचाने वाले वेयर के रूप में हो सकता है।
ऐसी खबरें थी कि सिक्यॉरिटी एजेंसियों ने सुरक्षाकर्मियों को इन चीनी एप्स का इस्तेमाल ना करने की सलाह दी थी क्योंकि इससे उनकी डेटा सिक्यॉरिटी को खतरा है।


   नई दिल्ली। होम लोन, पर्सनल लोन, वाहन कर्ज की ईएमआई चुका रहे लोगों के लिए आरबीआई ने फिर राहत दी है। अब जून, जुलाई और अगस्त की अपनी EMI चाहें तो होल्ड कर सकते हैं। आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि लॉकडाउन बढ़ने से मोरोटॉरियम और दूसरी राहते तीन महीने तक और बढ़ाई जा रही हैं। अब ईएमआई देने पर राहत 1 जून से 31 अगस्त तक के लिए बढ़ाई जा रही है।
  दरअसल आरबीआई को यह निर्णय इसलिए करना पड़ा कि लॉकडाउन के जारी रहने से लोगों की आय का फ्लो ​फिर से सुचारू नहीं हो पाया है। लोग ईएमआई मॉरेटोरियम की मौजूदा 31 मई तक की अवधि के खत्म होने के बाद मौजूदा परिस्थिति में अपना कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं होंगे। इसलिए मॉरेटोरियम को और तीन माह तक बढ़ाना पड़ा। यह कर्ज लेने वालों और बैंकों दोनों के लिए इस मुश्किल वक्त में मददगार रहेगा।
   भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 27 मार्च को बैंकों व वित्तीय संस्थानों को 1 मार्च 2020 तक बकाया सभी टर्म लोन्स लेने वालों को EMI के भुगतान पर 3 माह का मोरेटोरियम उपलब्ध कराने को कहा था। इस विकल्प में ग्राहक मार्च, अप्रैल और मई माह की अपनी EMI चाहें तो होल्ड कर सकते हैं।  हालांकि EMI स्थगन के इन तीन महीनों की अवधि के दौरान ब्याज लगता रहेगा, जो बाद में एक्स्ट्रा EMI के तौर पर देना होगा। जो ग्राहक अपनी EMI होल्ड नहीं करना चाहते, उन्हें कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। उनकी EMI वैसे ही कटती रहेगी, जैसे कट रही थी।

   उल्हासनगर। उल्हासनगर शहर में कोरोना ग्रस्त मरीजों की संख्या 154 हो गई है। गुरुवार को 10 नए कोरोना पॉजिटीव मरीज शहर में मिले हैं। मिली जानकारी के अनुसार उल्हासनगर-3 के हॉटस्पॉट इलाके ओटी सेक्शन सम्राट अशोक नगर से 1, चौपड़ा के ब्राह्मणपाड़ा से 1 और शांतिनगर के खन्ना कंपाऊड से 6 मरीज मिले हैं।  वहीं उल्हासनगर-4 के सुभाष टेकड़ी डिफेंस किराणा स्टोर परिसर तथा कैम्प 4 के श्रीराम नगर से भी 2 मरीजों के मिलने का समाचार मिला है। शहर में सुबह से दोपहर तक वाहनों की आवाजाही में वृद्धि हो गई है। लोग लॉकडाऊन का पालन नहीं कर रहे हैं। कई दुकानें भी बिना अनुमति के लिए खोली गई है। शहर में लॉकडाऊन का माहौल अब देखने को नहीं मिल रहा है। मनपा व पुलिस को सख्ती भरतने की जरूरत है। अगर शहरवासी इसका पालन नहीं करेंगे तो कोरोना ग्रस्त मरीजों का आकड़ा बढ़ते जाएगा। वहीं कई व्यापारी लॉकडाऊन का फायदा उठाकर कालाबाजारी भी कर रहे हैं। 
दुनियाभर में कोविड-19 से लाखों लोगों की मौत के बाद भी कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारत में भी कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अब चक लॉकडाउउन के चार फेज लागू किए जा चुके हैं, मगर इसकी रफ्तार अब भी तेज ही है। देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या एक लाख पार कर चुकी है और दुनियाभर में यह 11वें स्थान पर आ चुका है। गुरुवार के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना वायरस के 112359 मामले सामने आ चुके हैं और 3435 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, दुनियाभर की बात करें तो कोरोना के मामलों का आंकड़ा 50 लाख पार कर चुका है। 
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में कोरोना वायरस की बड़ी तहाबी देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र में कोविड-19 के कुल 39297 पॉजिटिव केस मिल चुके हैं। इनमें से 10318 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं या उन्हें छुट्टी दे दी गई है। इस राज्य में अब तक सबसे अधिक 1390 लोगों की जान जा चुकी है। 
दिल्ली: दिल्ली में कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार बढ़ते ही जा रही है। राजधानी में कोरोना वायरस के अब तक 11088 मामले आ चुके हैं। कोविड-19 महामारी से जहां 176 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 5192 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। 
गुजरात: महाराष्ट्र के बाद कोविड-19 ने सबसे ज्यादा गुजरात में तबाही मचाई है। गुजरात में कोरोना के 12 हजार मामले पार कर चुके हैं। यहां 12537 मामले अब तक आए हैं, जिनमें 749 लोगों की मौत हो चुकी है और 5219 लोग या तो स्वस्थ हो चुके हैं या फिर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।  
मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश भी कोरोना वायरस का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां कोरोना के मामलों की संख्या बढ़कर 5735 हो गई है, जिनमें से 267 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके अलावा, 2733 लोग ठीक हो चुके हैं।
तमिलनाडु: तमिलनाडु में भी कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 13 हजार पार कर चुकी है। इस राज्य में अब तक 13191 कोरोना के मामले आ चुके हैं। यहां इस महामारी से 87 की मौत भी हो चुकी है और 5882 पूरी तरह से ठीक भी हो चुके हैं। 
आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस के अब तक 2602 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 1640 लोगों का इलाज हो गया है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। यहां 53 की मौत भी हुई है।
बिहार: कोरोना वायरस के बिहार में अब तक 1674 मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, बिहार में कोरोना वायरस से 10 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 571 लोग ठीक हो चुके हैं।
उत्तर प्रदेश: यूपी में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।  अब तक यहां 5175 केस आ चुके हैं। हालांकि, इनमें से 3066 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं और 127 लोगों की मौत हो चुकी है।
राजस्थान: राजस्थान में भी कोरोना के मामलो में काफी तेजी देखी जा रही है। यहां कोरोना वायरस के अब तक 6015 मामले सामने आ चुके हैं। 147 लोगों की मौत का मामला सामने आया है, वहीं 3404 लोग ठीक हो चुके हैं।
पश्चिम बंगाल: बंगाल में भी कोरोना कहर बरपा रहा है। यहां कोरोना वायरस के अब तक 3103 संक्रमित मामले सामने आए हैं, जिनमें से 1136 की मौत हो चुकी है। इनमें से 253 लोग ठीक भी हो चुके हैं।
 देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 5,609 नए केस और 132  मौतें
देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़कर 112359 हो गई है और कोविड-19 से अब तक 3435  लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना वायरस के 5,609 नए मरीज मिले हैं और 132 मौतें दर्ज की गई हैं। 
-अमेरिका में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस से 1561 लोगों की मौत
-वर्ल्डोमीटर के आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 5,082,661 हो चुकी है और इस महामारी से अब तक 329,294 लोगों की मौत हो चुकी है। 
- अमेरिका में कोरोना वायरस से अब तक 92,387 की मौत हो चुकी है, जो पूरी दुनिया में किसी देश के लिए सबसे अधिक है
-चीन की असमर्थता के चलते कोरोना वायरस ने दुनियाभर में ली हजारों की जान: डोनाल्ड ट्रंप
कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया में जारी है और अमेरिका अब तक इससे सबसे अधिक तबाह हुआ है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस को लेकर एक बार फिर से चीन पर हमला बोला है। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर दुनियाभर में कोरोना वायरस को फैलाने और बड़े पैमाने पर हत्याओं को अंजाम देने का बड़ा आरोप लगाया है। बता दें कि अमेरिका में 91 हजार से अधिक लोगों की कोविड-19 से मौत हो चुकी है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, 'चीन में कुछ सनकी (सिरफिरे) बयान जारी कर कोरोना वायरस के लिए अन्य लोगों को दोष दे रहे हैं, जबकि चीन की नाकामी ने दुनियाभर में हत्याओं को अंजाम दिया। यह चीन की अक्षमता के अलावा और कुछ नहीं है।'

देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) से संक्रमित कुल मरीजों की तादाद शुक्रवार (15 मई) रात को चीन से ज्यादा हो गई। कोविड-19 के वैश्विक आंकड़ों पर नजर रखने वाली वेबसाइट वर्ल्डोमीटर्स में यह बात सामने आई है, जिसके मुताबिक रात करीब 9:30 बजे (भारतीय समयानुसार) भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 83,072 है, जबकि चीन में यह 82,933 है। हालांकि मरनेवालों की संख्या को देखा जाए, तो भारत अब भी चीन से काफी बेहतर है। देश में कोरोना से अब तक 2662 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं. चीन में इस बीमारी की वजह से कुल 4633 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
देश में 27 हजार से ज्यादा कोरोना मरीज स्वस्थ
पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 3967 नए मामले सामने आने से देश में संक्रमितों की संख्या 81,000 से अधिक हो गई, जबकि इसी अवधि में 1,000 लोगों की मौत हुई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से शुक्रवार (15 मई) सुबह जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश के विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 81,970 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं तथा 2649 लोगों की मौत हुई है, जबकि 27920 लोग इसके संक्रमण से पूरी तरह ठीक हुए हैं और उन्हें विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है। हालांकि शाम में विभिन्न राज्यों द्वारा जारी कोरोना के ताजे आंकड़ों के बाद देश में कुल मरीजों की तादाद 83,000 के करीब हो चुकी है।
चीन में 24 घंटे में कोरोना के चार नए मामले
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के केंद्र चीन में पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना के चार नये मामले दर्ज किये गये हैं, लेकिन इस दौरान इसके कारण यहां किसी की मौत नहीं हुई है। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। स्वास्थ्य आयोग ने बताया कि ये सभी मामले जिलिन प्रांत में दर्ज किए गए हैं। आयोग ने बताया कि अधिकारियों ने 11 ऐसे नए मामले दर्ज किए हैं, जिनमें कोई लक्षण नजर नहीं आया था। आयोग ने कहा, “राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग को देश के 31 प्रांतों से अब तक लगभग 82933 पुष्ट मामलों की जानकारी मिली है। इनमें से 11 लोग नाजुक स्थिति में हैं, 4633 लोगों की मौत हो चुकी है तथा 78209 लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।”

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज 4 बजे बताएंगी कैसे होगा 20 लाख करोड़ के पैकेज का इस्तेमाल

   केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए वो राहत पैकेज की बारीकियां बताएंगी। वह यह भी बताएंगी कि 20 लाख करोड़ का इस्तेमाल किन-किन क्षेत्रों में की जाएगी और इन्हें कितनी राशि दी जाएगी। इस राशि का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा। कोरोना संकट से बेपटरी हुई देश की अर्थव्यव्स्था को पटरी पर लाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी।
   बता दें कोरोना संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज देने की घोषणा की। यह भारतीय जीडीपी का करीब 10 फीसदी होगा। इसके साथ ही भारत राहत पैकेज देने के मामले में दुनिया का पांचवां बड़ा देश बन गया है। सबसे बड़ा राहत पैकेज देने में जापान पहले तो अमेरिका दूसरे स्थान पर है। 
  कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के नाम संबोधन में लॉकडाउन 4.0 की अनौपचारिक घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि 18 मई के बाद लॉकडाउन नए रंग-रूप में जारी रहेगा। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में लॉकडाउन 4.0 को लेकर जो संकेत दिए हैं, उसके मुताबिक लॉकडाउन का चौथा चरण अब तक के चरणों से कई मायनों में भिन्न होगा। इसमें न सिर्फ ज्यादा रियायतें दी जाएंगी, बल्कि राज्यों को भी अधिकार दिया जा सकता है कि वे तय कर सकते हैं कि किस तरह से इस महामारी से पार पाना चाहते हैं। कोरोना लॉकडाउन के चौथे चरण में अर्थव्यवस्था को खोलने की कवायदें भी देखी जा सकती हैं। 
लॉकडाउन-4 के नए रंग-रूप वाला होगा
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात की पुष्टि जरूर कर दी कि देश से अभी लॉकडाउन नहीं हटने वाला। यानी कोरोना वायरस की वजह से देश लॉकडाउन का चौथा चरण भी देखेगा। हालांकि, उन्होंने यह जरूर इशारा कर दिया कि 18 मई से जो लॉकडाउन लागू होगा, वह काफी अलग रंग-रूप में आएगा और इसके नियमों में भी बदलाव होगा। देश के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'लॉकडाउन-4 नए रंग-रूप वाला होगा, नए नियमों वाला होगा। राज्यों से हमें जो सुझाव मिल रहे हैं, इससे जुड़ी जानकारी आपको 18 मई से पहले दी जाएगी।’
छूट का दायरा और बढ़ेगा
माना जा रहा है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर देश को पूरी तरह से नहीं खोला जा सकता। यही वजह है कि अब चरणबद्ध तरीके से रियायतें और छूट का दायरा बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश होगी। इतना ही नहीं, इस बार राज्यों के सुझावों को ज्यादा महत्ता दी जाएगी। तभी पीएम मोदी ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि नियमों का पालन करते हुए हम कोरोना वायरस से लड़ेंगे भी और आगे भी बढ़ेंगे।
राज्यों को दिए जा सकते हैं ज्यादा अधिकार
दरअसल, राष्ट्र के नाम संबोधन से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की थी। इस बैठक में राज्यों को कोरोना लॉकडाउन को लेकर सुझाव देने को कहा गया। कई राज्यों ने बैठक के दौरान ही लॉकडाउन को बढ़ाने का सुझाव दिया तो कई ने हटाने अथवा काफी छूट देने की बातें कहीं। बताया जा रहा है कि राज्यों को लॉकडाउन पर 15 मई तक सुझाव देने को कहा गया है। इतना ही नहीं, राज्यों की ओर से पीएम मोदी के सामने लॉकडाउन में ढील, आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने और अलग-अलग जोनों के बंटवारे संबंधी फैसले राज्य सरकारों पर छोड़ने जैसे प्रस्ताव रखे गए। 
जोन के निर्धारण में दिखेगा बदलाव
लॉकडाउन के अब तक के चरणों पर गौर करें तो हमने पाया है कि क्रमबद्ध तरीके से सरकार ने छूट का दायरा बढ़ाया है ताकि जान और जहान दोनों चल सके। यही वजह है कि पिछले तीनों चरणों में मिली रियायतों को देखते हुए ऐसी संभावना जताई जा रही है कि लॉकडाउन-4 में सिर्फ रेड जोन, कंटेनमेंट जोन में ही सख्ती देखने को मिल सकती है। साथ ही रेड जोन का भी पुनर्निर्धारण किया जा सकता है और कई रेड जोन को ग्रीन या ऑरेंज जोन में बदला जा सकता है। ऑरेंज और ग्रीन जोन में जन-जीवन को सामान्य करने के लिए और भी छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
मुख्यमंत्रियों के साथ पीएम मोदी की बैठक से जो बातें सामने निकल कर आईं, उससे ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन के निर्धारण का अधिकार राज्यों को मिल सकता है। इसके अलावा, राज्य में आर्थिक गतिविधियों को लेकर राज्य सरकारें फैसला ले सकती हैं। जिस तरह से राज्यों ने शराब की बिक्री पर फैसला लिया, वैसे ही कई मसलों पर राज्यों को अधिकारें दी जा सकती हैं।
जन-जीवन को पटरी पर लाने की होगी कोशिश
लॉकडाउन-3 की तरह ही दफ्तरों को सीमित स्टाफ के साथ खोला जा सकता है, मगर अगले चरण में इसका दायरा और भी ज्यादा बढ़ सकता है। 25 मार्च के बाद से बंद पड़ी ट्रेनों को लॉकडाउन तीन के आखिरी चरण में खोल दिया गया है, उम्मीद की जा रही है कि अगले चरण में रेल सेवा में और भी रियायतें दी जा सकती हैं और ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। ठीक इसी तरह घरेलू विमानों का परिचालन भी शुरू किया जा सकता है। 

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक बार फिर से देश को संबोधित करने जा रहे हैं। पीएमओ इंडिया के ट्वीट के अनुसार, नरेंद्र मोदी का यह संबोधन रात आठ बजे शुरू होगा। इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना लॉकडाउन को लेकर पांचवीं बार मुख्यमंत्रियों से सोमवार को बात की थी। उन्होंने लॉकडाउन को पूरी तरह नहीं हटाने, बल्कि प्रतिबंधों में धीरे-धीरे छूट देने का संकेत देते हुए कहा था कि उनका दृढ़ मत है कि लॉकडाउन के पहले तीन चरणों में जिन उपायों की जरूरत थी, वे चौथे में जरूरी नहीं हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्रियों से 15 मई तक व्यापक रणनीति के लिए सुझाव देने को कहा कि वे अपने-अपने राज्यों में लॉकडाउन की व्यवस्था से कैसे निपटना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न स्थिति पर विस्तृत चर्चा की और कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए संतुलित रणनीति बनाने की जरूरत है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है कि गांव इस महमारी से मुक्त रहें।

पिछले संबोधन में क्या बोले थे पीएम मोदी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछली बार कोरोना लॉकडाउन को लेकर अप्रैल के मध्य में देश के नाम संबोधन दिया था। तब उन्होंने देशव्यापी लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाने का ऐलान किया था। कोरोना वायरस लॉकडाउन के 21वें दिन सुबह 10 बजे पीएम मोदी ने कहा था कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देश में 3 मई तक लॉकडाउन रहेगा। पीएम मोदी ने कहा था कि देश पूरी मजबूती के साथ कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहा है। जिस तरह से देशवासियों ने त्याग और तपस्या का परिचय दिया है, वह कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अहम है। वहीं, इससे पहले प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 24 मार्च को 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी।
25 मार्च से जारी है लॉकडाउन
कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से 25 मार्च से लॉकडाउन जारी है। 54 दिन का लॉकडाउन 17 मई को समाप्त होने वाला है। कोरोनो वायरस को फैलने से रोकने के लिए यह लगाया गया था।
देश में कोरोना के अभी कितने मरीज?
देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 70 हजार को पार कर चुकी है। मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों की संख्या 2,293 तक पहुंच गई है, जबकि संक्रमितों की संख्या 70,756 हो गई है। सोमवार सुबह आठ बजे से 24 घंटे के भीतर 3,604 नए मामले सामने आए हैं और 87 लोगों की मौत हुई है।

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के  3390 नए मामले सामने आए हैं और 103 लोगों की मौत हुई है। शुक्रवार को जारी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में कोरोना वायरस के मामले बढ़कर 56,342 हो गए हैं और कोविड-19 से अब तक 1,886 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना के कुल 56,342 केसों में 37916 एक्टिव केस हैं, वहीं 16539 लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। कोरोना वायरस से अब तक सर्वाधिक 694 लोगों की मौत महाराष्ट्र में हुई। यहां अब इस महामारी से पीड़ितों की संख्या 21969 हो गई है। तो चलिए जानते हैं टॉप 10 राज्य में क्या है कोरोना वायरस की स्थिति....
महाराष्ट्र:  महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा कहर देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र में कोविड-19 के कुल 21969 पॉजिटिव केस मिल चुके हैं। कोरोना के इन कुल केसों में से 17974 केस एक्टिव हैं और 3301 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं या उन्हें छुट्टी दे दी गई है। इस राज्य में अब तक सबसे अधिक 694 लोगों की जान जा चुकी है। 
दिल्ली: दिल्ली में भी कोरोना के संक्रमण का मामला बढ़ रहा है। राजधानी में कोरोना वायरस के अब तक 7977 मामलों में 5980 एक्टिव केस हैं। कोविड-19 महामारी से जहां 66 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 1931 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। 
मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश भी कोरोना वायरस का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां कोरोना वायरस के मामलों की संख्या बढ़कर 4676 हो गई है, जिनमें से 193 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके अलावा, 1231 लोग ठीक हो चुके हैं।
गुजरात: महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा गुजरात प्रभावित दिख रहा है। गुजरात में कोरोना वायरस के अब तक 9146 मामले सामने आ चुके हैं। गुजरात में कोरोना से 425 लोगों की मौत हो चुकी है और 1709 लोग या तो स्वस्थ हो चुके हैं या फिर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।  
तमिलनाडु: तमिलनाडु में भी कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 6993 हो गई है। इनमें से 5409 केस एक्टिव हैं। यहां इस महामारी से 37 की मौत भी हो चुकी है और 1547 पूरी तरह से ठीक भी हो चुके हैं। 
आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस के अब तक 2665 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 780 लोगों का इलाज हो गया है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। यहां 38 की मौत भी हुई है।
बिहार: कोरोना वायरस के बिहार में अब तक 801 मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, बिहार में कोरोना वायरस से 5 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 246 लोग ठीक हो चुके हैं।
उत्तर प्रदेश: यूपी में कोरोना वायरस के 4383 केस आ चुके हैं। हालांकि, इनमें से 1250 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं और 62 लोगों की मौत हो चुकी है।
राजस्थान: यहां कोरोना वायरस के अब तक 5120 मामले सामने आ चुके हैं। 97 लोगों की मौत का मामला सामने आया है, वहीं 1596 लोग ठीक हो चुके हैं।
पश्चिम बंगाल: बंगाल में कोरोना वायरस के अब तक 2063 संक्रमित मामले सामने आए हैं, जिनमें से 151 की मौत हो चुकी है। इनमें से 364 लोग ठीक भी हो चुके हैं।
महाराष्ट्र में अब तक 531 पुलिसकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें 51 अधिकारी भी शामिल हैं। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि संक्रमितों में 480 कांस्टेबल हैं, जिनका राज्य के विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 531 संक्रमितों में से अब तक आठ अधिकारियों समेत 39 पुलिसकर्मी स्वस्थ हो चुके हैं। देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 24 मार्च को लॉकडाउन लगाया गया था और इसे 17 मई तक बढ़ा दिया गया है।
इस बीच, अधिकारी ने कहा कि अब तक महाराष्ट्र पुलिस ने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में 96,231 मुकदमे दर्ज किए हैं और 18,858 लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद से पुलिसकर्मियों पर हमला करने के 189 मामले सामने आए, जिनमें 73 पुलिसकर्मी और एक होमगार्ड घायल हुए और इन हमलों को लेकर 683 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले दिन में, महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने ट्वीट कर कहा कि देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद से राज्य में 487 पुलिसकर्मी कोविड-19 से संक्रमित पाए गए हैं। वहीं, राकांपा नेता ने ट्विटर पर कहा कि आवश्यक सेवा प्रदाताओं और आपात स्थिति में फंसे लोगों को अब तक 3,10,694 पास जारी किए गए हैं।
मंत्री ने बताया कि राज्य में 2,24,219 लोगों को पृथक किया गया है और 649 लोग पृथक-वास नियम का उल्लंघन करते हुए पाए गए। उन्होंने ट्वीट किया, राज्य सरकार 4,738 राहत शिविर चला रही है जहां 4,35,030 प्रवासी मजदूरों को भोजन के साथ शरण मुहैया कराई गई है। अवैध परिवहन के 1,281 मामले दर्ज किए गए हैं।

देशभर में लॉकडाउन 2 सप्ताह के लिए बढ़ाया गया 

ग्रीन और ऑरेन्ज जोन में शर्तों के साथ छूट

नई दिल्ली। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन को 2 सप्ताह के लिए बढ़ाया गया है। देश में 40 दिनों का लॉकडाउन 3 मई को पूरा हो रहा है। इस बीच केंद्रीय गृहमंत्रालय ने लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा कर दी है। हालांकि, इस बार ग्रीन और ऑरेन्ज जोन में पहले से अधिक छूट दी जाएगी। लेकिन सोशल डिस्टेंशिंग के नियम पहले की तरह जारी रहेंगे। 
    बता दें कि सबसे पहले 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. 25 मार्च से 14 अप्रैल तक पहला लॉकडाउन चला. इसके बाद 15 अप्रैल से 3 मई तक 19 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान भी पीएम मोदी की ओर से किया गया था. हालांकि इस बार गृह मंत्रालय के जरिए लॉकडाउन बढ़ाए जाने का ऐलान किया गया है.
    गृहमंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि लॉकडाउन से कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में देश को काफी लाभ हुआ है। लॉकडाउन को 4 मई से अगले 2 सप्ताह तक बढ़ाने की घोषणा की जाती है। रेड, ग्रीन और ऑरेन्ज जोन के लिए अलग-अलग गाइडलाइंस तैयार की गई है। ग्रीन और ऑरेन्ज जोन में काफी छूट भी दी गई है। 
   देशभर में कोरोना का कहर जारी है और बीते 24 घंटे में कोरोना के 1755 नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं और 77 मौतें हुई हैं। कोरोना वायरस के कारण देशभर में 1152 लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में कोविड-19 से अब भी 35,365 लोग संक्रमित हैं जबकि 9065 लोग स्वस्थ हो गए और एक मरीज देश छोड़कर चला गया।
   राज्यों ने भी दी थी लॉकडाउन बढ़ाने की सलाह
   पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ लॉकडाउन पर चर्चा की थी। इस दौरान अधिकतर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की राय थी कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लॉकडाउन अभी जारी रखा जाए। हालांकि, कुछ राज्यों ने लॉकडाउन के साथ ही आर्थिक गतिविधियों को शर्तों और सावधानियों के साथ चालू करने पर जोर दिया था।


21 दिनों का पहला लॉकडाउन 24 मार्च से 14 अप्रैल तक चला। 18 दिनों का दूसरा लॉकडाउन 3 मई तक चलेगा। इस बीच सबके मन में यही सवाल है कि क्या देश में लॉकडाउन 3 भी होगा? हालांकि, केंद्र सरकार ने इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है, लेकिन कई राज्यों ने लॉकडाउन बढ़ाने की अपील की है। ध्यान रहे कि पहला लॉकडाउन खत्म होने से पहले भी राज्यों ने इसी तरह लॉकडाउन बढ़ाने की गुजारिश की थी और केंद्र सरकार ने सभी की सलाह को मानते हुए देशवासियों को 3 मई तक घरों में ही रहने को कहा था।

इन राज्यों ने की है अपील
दिल्ली सहित छह बड़े राज्यों ने लॉकडाउन को 3 मई से आगे बढ़ाने की इच्छा जाहिर की है। दिल्ली सरकार ने कहा है कि लॉकडाउन को 16 मई तक बढ़ाया जाए। वहीं, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और ओडिशा ने अपने राज्यों के हॉटस्पॉट पर प्रतिबंध को 3 मई के बाद भी जारी रखने के संकेत दिए हैं। वहीं, तेलंगाना ने तो लॉकडाउन को पहले ही 7 मई तक बढ़ा दिया है।
इन राज्यों को पीएम के फैसले का इंतजार
हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात ने कहा है कि वे केंद्र सरकार की ओर दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहे हैं और केंद्र सरकार जैसा कहेगी उसी मुताबिक आगे बढ़ेंगे। वहीं बिहार, असम, केरल की सरकारों ने कहा है कि वे पीएम नरेंद्र मोदी के साथ सोमवार को चर्चा के बाद लॉकडाउन पर कोई फैसला करेंगे। 
कुछ राज्यों में मिल सकती है छूट
जानकारों के मुताबिक, सरकार इस बार लॉकडाउन का फैसला राज्य सरकारों पर भी छोड़ सकती है। माना जा रहा है कि जिन राज्यों में केस काफी कम हैं वहां प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। ऐसे कई राज्य हैं जहां कोरोना केसों की संख्या अभी भी कुछ दर्जन तक सीमित है और अधिकतर केस कुछ ही जिलों में सिमटे हैं। ऐसे राज्यों को कंटेनमेंट जोन के अलावा अन्य जगहों पर लोगों के घर से निकलने और कामकाज करने की इजाजत दी जा सकती है। हालांकि, सोशल डिस्टेंशिंग और मास्क आदि की अनिवार्यता अभी बरकरार रखी जाएगी। राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों पर रोक पहले की तरह जारी रखी जाएगी।
सोमवार को हो सकता है फैसला
आगे की रणनीति बनाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ विचार विमर्श शुरू कर दिया है। कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने शनिवार को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात की। उन्होंने गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार आर्थिक गतिविधियों की बहाली, प्रवासी मजदूरों के मुद्दे और विदेशों में फंसे हुए भारतीयों को लेकर चर्चा की। अब सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी राज्य सरकारों से बातचीत करने के बाद अंतिम फैसला लेंगे। 
दिल्ली में 16 मई तक बढ़ सकता है लॉकडाउन
माना जा रहा है कि यदि केंद्र सरकार ने राज्यों पर फैसला छोड़ा तो दिल्ली में केजरीवाल सरकार लॉकडाउन को 16 मई तक बढ़ा सकती है। कोविड-19 से निपटने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से गठित समिति के अध्यक्ष डॉ एसके सरीन ने शनिवार (25 अप्रैल) को कहा, ''भारत में अभी भी महामारी का ग्राफ चढ़ रहा है इसलिए प्रतिंबधों में ढील देने का मतलब है कि मामलों में बेतहाशा वृद्धि हो जाएगी। दिल्ली में निषिद्ध क्षेत्रों की संख्या काफी है इसलिए इसका विस्तार करना समझदारी होगी। लॉकडाउन को 16 मई तक बढ़ाना होगा।''
महाराष्ट्र सरकार 15 दिन बढ़ा सकती है लॉकडाउन
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार 3 मई के बाद भी मुंबई और पुणे में लॉकडाउन का विस्तार कर सकती है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने एचटी मिंट से कहा कि अगर कोरोनो वायरस का प्रसार कम नहीं हुआ, तो लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता होगी। टोपे ने मिंट को बताया, "लॉकडाउन को लागू करने का मुख्य उद्देश्य कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकना था और अगर ये नहीं रुकता है, तो हमें लॉकडाउन का विस्तार करना होगा।" उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो, तो हम 3 मई के बाद 15 दिनों के लिए लॉकडाउन का विस्तार केवल जरूरी जगहों पर करेंगे।

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने शनिवार (25 अप्रैल) को कहा कि राज्य में लॉकडाउन के नियमों में तीन मई तक कोई बदलाव नहीं होगा। टोपे ने कहा कि दुकानों को खोलने के संबंध में केन्द्र की ओर से जारी नए आदेश में कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री के साथ सोमवार को वीडियो कांफ्रेंस के बाद चीजें स्पष्ट होंगी।" मंत्री ने कहा, ''हमें केन्द्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। लेकिन लॉकडाउन के नियमों में तीन मई तक और कोई छूट नहीं दी जाएगी।" टोपे ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ बैठक में प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने का मुद्दा भी उठाया जाएगा।
महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के 7628 मामले, 323 की मौत
महाराष्ट्र वैश्विक महामारी कोरोना वायरस 'कोविड-19' के आगे बेबस नजर होता नजर आ रहा। राज्य में शनिवार (25 अप्रैल) को 811 नए मामले सामने आए और कुल संक्रमितों की संख्या 7628 पर पहुंच गई है। इस दौरान 22 मरीजों की मौत से इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या 323 हो गई है। राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से शनिवार शाम यह जानकारी दी गई। देश की वाणिज्यिक नगरी मुंबई का बुरा हाल है। पिछले 24 घंटों में 281 नए मामलों से कुल संक्रमितों की संख्या 4870 पर पहुंच गई, जबकि इस दौरान 12 और की मौत हो जाने से मृतक 191 हो गए।

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