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स्कूल द्वारा लूट खसोट, टैब लेना अनिवार्य, स्कूल फीस के लिए दबाव

12,500 का एक ही कंपनी का टैब लेने पर दबाव
पालकों द्वारा फीस माफ की मांग बढ़ी
   उल्हासनगर। कोरोना महामारी के चलते पिछले दो माह से शैक्षिणक संस्थाएं पूरी तरह बंद हैं। सरकार के आदेशानुसार सभी निचले से ऊपरी ग्रेड तक के बच्चों की परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई है। मुंबई में अब केवल फाईनल ईयर के बच्चों की परीक्षा पर फैसला आना बाकी है। नीचले से ऊपरी तक के ग्रेड के बच्चों को परमोट करके आगे की कक्षा में भेजा गया है। जून के पहले अथवा दूसरे सप्ताह से नए टर्म के लिए स्कूलें शुरू होती है लेकिन लाॅकडाऊन से राहत न मिलने के कारण और कोरोना प्रकोप पर काबू न पाने के बाद शैक्षिणक संस्थाओं ने आनलाईन पढ़ाई हेतु तैयारियां कर ली हैं। ऐसे में एक बड़ी चौंकाने वाली खबर सामने आयी है उल्हासनगर शहर के पास एक बड़े निजी स्कूल ने आगामी वर्ष के लिए बच्चों को आनलाईन पढ़ाने के लिए 12,500 रुपए का टैब लेना अनिवार्य किया है और पूरे वर्ष की फीस बढ़ने पर दबाव डाला जा रहा है जिससे पालकों में रोष है।
  एक तरफ राज्य कोरोना प्रकोप के कारण देशभर में आर्थिक हालात खराब चल रहे हैं तो दूसरी तरफ निजी स्कूल जो अपने आपको 5 स्टार कैटेगरी का समझता है उन्होंने इन दिनों लूट मचा रखी है। एक पालक ने अपना नाम न बताने की शर्त पर बताया है कि आनलाईन पढ़ाई के लिए हमारे पास मोबाईल उपलब्ध है अथवा लेपटाप भी लेकिन फिर भी अपने कमाई करने के लिए स्कूल द्वारा टैब लेने पर जोर दिया जा रहा है और इतना ही नहीं उसी एक टैब डीलर से टैब लेना है जिसमें केवल स्कूल का ऐप चलाएगा और शिक्षा शुरू होगी। जबकि यह कार्य मोबाईल, लैपटाप अथवा घर में रखे बच्चों के कंप्यूटर पर भी हो सकता है लेकिन स्कूल अब कोरोना में भी अपनी रोटियां सेक रही हैं। यह टैब 12,500 हजार रुपए का बताया गया है। जिसे हर कोई लेने में असमर्थ है और अगर आपके घर में 4 बच्चे एक ही स्कूल के हों तो भी सबके लिए यह टैब लेने अनिवार्य है। इस टैब में केवल स्कूल का ही ऐप चलेगा और कुछ भी नहीं जो लाॅकडाऊन के बाद किसी काम का नहीं होगा।  वहीं स्कूल फीस पर भी दबाव डाला जा रहा है बस सेवा बंद है अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही लेकिन स्कूल फीस में कोई कटौती नहीं करते हुए फीस पूरी तरह भरने का दबाव पालकों पर डाला गया है। जबकि इस संकट के समय स्कूल फीस माफ करनी चाहिए अथवा सहुलियत देनी चाहिए लेकिन स्कूल लूट खसोट में व्यस्त है। ऐसे स्कूल में पालकों को नहीं भेजना चाहिए क्योंकि शिक्षा तो कहीं भी मिलती है ऐसे स्कूलों का निषेध कर शिक्षण मंत्री से इसकी शिकायत करके मान्यता रद्द करनी चाहिए। हरियाणा में निजी स्कूलों को फीस न लेने का आदेश दिया है इसी तरह का आदेश महाराष्ट्र में भी लागू होना चाहिए।

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