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कोरोना को अभी नहीं रोका तो विकराल रूप ले सकता है

     उल्हासनगर। उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या चार नए मरीज मिलने के कारण 7 हो गई है यह पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ शहरवासियों के लिए भी गंभीर स्थिती है क्योंकि अगर यह धारावी की तरह पैर पसारने लगा तो कोरोना कभी भी विकराल रूप ले सकती है। इसी विषय में महानगरपालिका आयुक्त सुधाकर देशमुख ने शहरवासियों के लिए संदेश जारी किया है।

    उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र में 2011 को किए गए जनगणना के मुताबिक शहर की आबादी 5 लाख 6 हजार है। यह शहर 13 किलोमीटर में फैला हुआ है यानि करीब प्रत्येक कि.मी. में 50 हजार लोग रह रहे हैं झुग्गियों में 20 हजार लोग प्रति कि.मी.में रह रहे हैं जोकि बहुत अधिक है। उल्हासनगर शहर मुंबई के उपनगरों के शहरों में आता है और मंगलवार तक शहर में कोरोना की स्थित काबू में थी लेकिन चार नए मरीज भीड़ वाले झुग्गी क्षेत्र में मिलने के बाद अब स्थित गंभीर हो गई है।
   
19 मार्च को मिला था पहला मामला
    मनपा आयुक्त के मुताबिक उल्हासनगर शहर में कोरोना का पहला मामला 19 मार्च 2020 को तब मिला जब दुबई से लौटी एक महिला कोरोना पाॅजिटीव पायी गई लेकिन तेजी से मिले उपचार के चलते उसे अगले ही सप्ताह 26 मार्च को नेगेटिव रिपोर्ट के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। 25 अप्रैल 2020 तक शहर में कोई भी कोरोना का मरीज नहीं मिला था। 25 अप्रैल को उल्हासनगर निवासी एक आरोग्य कर्मचारी जोकि मुंबई के धारावी ईलाके में एक क्लिनिक में कार्यरित था वो पाॅजिटीव पाया गया लेकिन उसका परिवार कोरोना नेगेटिव निकला। इसी तरह उल्हासनगर निवासी एक नर्स जोकि मुंबई के भाभा अस्पताल में कार्यरित है वो पाॅजिटीव पायी गई लेकिन उनके परिजन नेगेटिव पाए गए। एक वृध्द महिला को संदेह के आधार पर कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया लेकिन उसकी रिपोर्ट नेगेटिव पायी गई। 
    25 अप्रैल से मनपा को कई शिकायतें मिली कि कई लोग मुंबई से निकलकर सुरक्षित शहरों में पनाह के लिए घूस रहे हैं उनमें से कुछ लोगों को पकड़कर क्वारनटाईन किया गया है। लेकिन इस परिस्थित में सब पर नजर रखना पुलिस व प्रशासन के लिए भी कठिन है। ऐसे में पुलिस कर्मी भी संक्रमित हो रहे हैं। 20 मार्च से सरकारी तंत्र भी कार्य कर रहा है। कोरोना के लक्षण 14 दिनों अथवा कम से कम 7 दिनों में पता चलते हैं ऐसे में मुंबई अथवा अन्य इलाके से आए संक्रमित मरीज शहर में भी पाए जा सकते हैं जिस कारण शहर में कोरोना के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ सकती है जैसे 26 अप्रैल 2020 को मुंबई के येलो गेट पुलिस थाने में कार्यरित उल्हासनगर निवासी पुलिस कर्मी को कोरोना पाॅजिटीव पाया गया। दो दिनों बाद 28 अप्रैल को क्वारनटाईन में रखे गए पुलिस कर्मी की पत्नी व तीन बच्चों को भी कोरोना पाॅजिटीव पाया गया हैं।
     28 अप्रैल उल्हासनगर शहर के लिए एक काला दिवस है। क्योंकि चार नए कोरोना मरीज जो मिले हैं वो ऐसे परिसर में रहते हैं जो पूरी तरह झुग्गी में फैला हुआ है। यह बहुत ही कठिन है कि प्रत्येक घर में जाकर कोरोना टेस्ट कराया जाए यह क्षेत्र हाय रिस्क का हो गया है। इसलिए इस क्षेत्र के लोगों से अपील है कि अपनी जिम्मेदारी को समझे और अगर कोरोना के लक्षण अथवा किसी भी तरह की आरोग्य पीड़ा हो तो अपना कोरोना जांच कोविड अस्पताल में कराएं। यह कराने से अपनों के साथ दूसरों को भी जीवन दे सकता है।
    नियमों का पालन करें और सुरक्षित रहें
    मनपा आयुक्त देशमुख शहरवासियों से कई बार अपील कर चुके हैं कि अपने शहर अथवा घरों से बाहर न जाए और अपने रिश्तेदारों को भी अपने घरों में न बुलाए यह खतरनाक हो सकता है। सामाजिक दूरी का पालन भी नहीं किया जा रहा है जिस कारण हमें सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं और अगर फिर भी लोग नहीं समझे तो कोरोना का विकराल रूप शहरवासियों को देखना पड़ेगा। अगर हम नियमों का पालन करेंगे तो कोरोना पर जरूर जीत पाएंगे।
   अगर शहरवासी लाॅकडाऊन का पालन नहीं करेंगे तो कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जाएगी और शहर रेड झोन से आरेंज अथवा ग्रीन झोन में नहीं आ सकेगा जिस कारण शहर को कब तक बंद रखा जाएगा फिर यह कहना मुश्किल हो जाएगा। कोरोना मरीज मिलने के बाद भी शहर के कई परिसरों में भीड़ देखी जा रही है। अपने शहर को कोरोना मुक्त करने के लिए शहरवासियों को ही सुरक्षित रहना है।
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